Inspirational story.

Story-1---

एक समय की बात है , किसी देश में एक प्रिंस रहते थे वह अपने देश के बहुत बड़े शासक थे। लोग उन्हें अपना न्यायाधीश मानते थे। प्रिंस की एक ही कमजोरी थी कि उन्हें किसी भी बात पर झट से क्रोध आ जाता था। और वह मुजरिम को क्रोध में कड़ी सजा दे देते थे।
एक बार प्रिंस अपने महल में एक स्वचालित दरवाजा लगवाना चाहते थे। तो प्रिंस ने अपने दरबारियों से कहकर अभियंता बुलवाने को कहा। 
दरबारी गए और तीन अभियंता को लेआए।
प्रिंस - (दरबारी से)  इतने से काम के लिए तुम तीन तीन अभियंता ले आए।
दरबारी- अरे प्रिंस तीन है तो काम जल्दी व अच्छा होगा।
प्रिंस - (अभियंता से) आप लोगो को पता है कि आपको 
क्या काम दिया गया है और एक बात में भी आपको बता दू की यदि कार्य ठीक से व उचित नहीं हुआ तो आप लोगो को मृतुडंड दिया जाएगा और यदि उचित हुआ तो आपको आपलोगो के वजनानुसार सोना दिया जाएगा।
यदि मंजूर हो तो ही कार्य स्वीकार करे अन्यथा मना कर दे।
पहला अभियंता - मै आपका कार्य बहुत अच्छा करुगा। 
दूसरा अभियंता - नहीं मै आपका कार्य बहुत अच्छा कारुगा।
तीसरा अभियंता - अरे प्रिंस मै इन दोनों से आपका कार्य अच्छा करूंगा।
प्रिंस- आप तीनों आपस में झगड़ेे नहीं और एक साथ मिलकर कार्य बहुत अच्छा करें ध्यान रहे कार्य खराब ना हो जाए ।

"तीनों अभियंता अपने काम में जुट गए। और अंत में प्रिंस के मन का कार्य नहीं किया और वह स्वचालित गेट बनाने में असफल रहे"

अब क्या होना था। तीनों अभियंता प्रिंस के बुलाने पर दरबार में पहुंचे।
तीनों अभियंता अपनी अपनी बात को प्रिंस के सामने रखने लगे।

प्रिंस ने किसी की नहीं सुनी और तीनों को मौत की सजा सुना दी ।

प्रिंस का सजा देने का तरीका कुछ और ही था ।
एक स्वचालित आरी द्वारा उन तीनों के गले कटना था।उनकी मौत एक स्वचालित आरी के द्वारा होनी थी।

प्रिंस ने कहा अब तुम तीनों को एक-एक करके इसी आरी के द्वारा काटा जाएगा। 

प्रिंस ने पहले अभियंता को बुलाया और लेटने को कहा। और उसके हाथ बांध दिए।
अब प्रिंस ने स्विच ऑन करने को कहा। जैसे ही स्वचालित आरी का स्विच ऑन हुआ, तुरंत ही वह आरी घूमते घूमते अभियंता के गर्दन के ठीक नजदीक आकर रुक गई।
प्रिंस इसे उस अभियंता की किस्मत समझने लगा। और उससे कहने लगा जा तुझे अल्लाह ने बचा लिया। तेरी किस्मत अच्छी थी तू बच गया। और उसे बक्स दिया।

अब प्रिंस ने दूसरे अभियंता को बुलाया। ठीक उसी प्रकार वह आरी घूमते घूमते उसकी भी गर्दन के नजदीक रुक गई। प्रिंस ने कहा क्या बात है, तेरी भी किस्मत बहुत अच्छी है, तेरे ऊपर भी अल्लाह ने रहम किया है। जा तुझे भी मैं छोड़ता हूं।

यह सब होते देख, तीसरा अभियंता अपनी होशियारी दिखाते हुए प्रिंस से कहने लगा।

कि क्या बार-बार आप कह रहे हैं कि अल्लाह की मर्जी अल्लाह की मर्जी,
या अल्लाह की मर्जी नहीं है, बल्कि इस आरी का नट ढीला है। 
और उसने उस आरी का नट कस दिया।

और प्रिंस के बोल सुनकर वह हक्का-बक्का रह गया। प्रिंस ने कहा कि अब तुम्हारी बारी।

इसके बाद तो आप लोग समझदार है की अब क्या होना था।

वह आरी बिना रुके बिना अटके अभियंता की गर्दन काटती गई।

शिक्षा  - (हमें जहां जरूरत ना हो वहा बिल्कुल भी नहीं बोलना चाहिए, और जरा कम बोलना चाहिए, प्रत्येक बात सोच समझकर करनी चाहिए,) 
(क्योंकि यदि वह अभियंता नहीं बोलता, अपनी होशियारी नहीं दिखाता, तो वह भी बच जाता,)Best story books u can buy now

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